Sunday, August 3, 2008

दोस्ती का दिन

सभी ब्लोगर मित्रों को मित्रता के दिन की खास शुभकामनाएं। आज का यह दिन सभी लोगों को दोस्ती के मायने, दोस्ती की पहचान, दोस्तों के दायरे इन सब से बहोत कुछ सीखने के लिए प्रेरित करता है। लकिन दोस्ती के इश दिन को मनाने में लगे दोस्तों को शायद यह सब सोचने की फुरसत ही नहीं है। खैर छोड़ो मैं आज के इस दिन को ख़राब नहीं करना चाहता। अब असल बात पर आते हैं। हमारे सदर साहब गएँ हैं दोस्ती का पैगाम लेकर सब दुआ करो की वे अपने मकसद मैं कामयाब हों और अगला शायद अब तो कुछ सोचे। यूँ तो मियां मुसर्रफ ने भी खूब सोचाथा। इसलिए ही तो आगरा आकर लोट गए। यह तो हुई पुरानी बात। आब फिर बात करेंगे देखते हैं क्या हश्र होता है। हलाकि सीमा पर घुसपैठ गोलीबारी बदस्तूर जारी है, बम विस्फोट का अब तक खुलाशा नहीहो पाया है। और सदर साहब चले दोस्ती का हाथ थामने। जय हो इस लोकतंत्र की। हाथ जरूर मिलायेंगे फिर दिल मिले या न मिले। पहले भी हाथ ही तो मिलते रहे हैं। अगर दिल मिल जाते तो शायद आज हम को इतने पापड़ नहीं बेलने पड़ते। पर क्या करें हाई रे किस्मत। नेतागिरी ने सब कबाडा जो कर दिया। इसीलिए तोकहते हैं मेरे भाई। शायद दोस्ती के इस दिन को मन रहे सब लोगों को मेरी बात समझ आ गई होगी।

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